भाषा, कर्नाटक चुनाव की तारीख कथित तौर पर लीक होने के मामले में शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर तीखा हमला करते हुए कहा कि लोकतंत्र के स्तंभों को ध्वस्त किया जा रहा है। शिवसेना ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है।

इतना ही नहीं शिवसेना ने चुनाव आयोग से सवाल किया है कि क्या वह बीजेपी के हिसाब से काम कर रहा है? शिवसेना की यह टिप्पणी बीजेपी के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय के एक विवादित ट्वीट के संबंध में आई है। दरअसल, बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीख की घोषणा चुनाव आयोग से पहले कर दी थी।

शिवसेना ने कहा, ‘ऐसा माना जाता था कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रहेगा लेकिन कर्नाटक चुनाव में यह साबित नहीं हो पाया।’ शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा, ‘जैसा कि विपक्ष दावा करता है कि चुनाव आयोग सरकार के दबाव में काम कर रहा है। यह बात बीजेपी ने सही साबित कर दी है।’

बता दें कि बीजेपी आईटी सेल के चीफ अमित मालवीय ने चुनाव की तारीख तो सही बताई थी लेकिन काउंटिंग की तारीख सही नहीं निकली। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना का कहना है, ‘बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय नाम के व्यक्ति ने चुनाव आयोग से भी पहले विधानसभा चुनाव की तारीख जारी कर दी। क्या किसी व्यक्ति द्वारा यह जानकारी लीक की गई या फिर चुनाव आयोग ने बीजेपी की सहूलियत के हिसाब से काम करने का फैसला किया है?’

शिवसेना ने अपनी सहयोगी पार्टी पर हमले करते हुए कहा कि चुनाव आयोग के पूर्व प्रमुखों को राज्य सभा के टिकट दिए जा रहे हैं, उन्हें मंत्री बनाया जा रहा है और राज्यपाल के पद दिए जा रहे हैं। ये सभी इस बात के संकते हैं कि वह निष्पक्ष नहीं रह गए हैं। नोटबंदी के फैसले का हवाला देते हुए शिवसेना ने कहा कि सरकार का बड़े मूल्य के नोटों को चलन से बाहर करने का फैसला पूरी तरह से नाकामयाब था और यहां तक कि नोटबंदी की घोषणा से पहले ही गुजरात के एक समाचारपत्र में इस बारे में एक खबर भी प्रकाशित की गई थी।

शिवसेना ने कहा, ‘ऐसी स्थिति में क्या संवैधानिक पदों के लिए आदर-सम्मान का भाव रह गया है? हमारे लोकतंत्र के स्तंभों को ध्वस्त किया जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन ने तो पहले से ही चुनाव आयोग में विश्वास खत्म कर दिया है। बाकी जो भी कुछ इसमें विश्वास बच गया था, वह कर्नाटक मुद्दे से समाप्त हो गया।’