मुंबई, महाराष्‍ट्र में मुख्‍यमंत्री सच‍िवालय अर्थात ‘सीएमओ’ ने साल 2017 में 3 करोड़ रुपये से अध‍िक की चाय पी डाली। इस बात का खुलासा आरटीआई की एक र‍िपोर्ट आने के बाद हुई है। आरटीआई के जरिए मिली इस जानकारी को मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने बुधवार को सबके सामने रखा। किया। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय से पूछा कि क्या ‘सीएमओ’ में सोने की चाय पी जाती है? शाम तक सीएमओ की तरफ से इस पर सफाई देते हुए कहा गया कि आरटीआई में दी गई जानकारी का गलत मतलब निकाला जा रहा है।

पिछले सप्ताह बीजेपी नेता एकनाथ खडसे ने आरटीआई के जरिए मंत्रालय का चूहा घोटाला उजागर करके मुख्यमंत्री पर निशाना साधा था। अब मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम ने सीएमओ में चाय घोटाले का भंडाफोड़ किया है। उन्होंने आरटीआई के मिली जानकारी को मीडिया के सामने रखा।

3 करोड़ का चाय -नाश्‍ता
आरटीआई र‍िपोर्ट में कहा गया है कि सीएमओ ने 2017-18 में चायपान और अल्पाहार पर 3 करोड़ 34 लाख 64 हजार 905 रुपये खर्च किए हैं, जबकि 2016-17 में यह खर्च 1 करोड़ 20 लाख 92 हजार 972 रुपये था। वहीं, 2015-16 में 57 लाख 99 हजार 156 रुपये खर्च किए गए थे।

सीएमओ रोज पीती है 18 हजार 500 कप चाय
आरटीआई से मिली इस जानकारी के आधार पर निरुपम ने कहा कि सीएमओ के चायपान और अल्पाहार के खर्च में 577 प्रतिशत की बढ़ोतरी अस्वाभाविक है। क्या सीएमओ में रोजाना 18 हजार 500 कप चाय पी जाती है?

RTI
 
साल-दर-साल बढ़ा खर्च

2015-16 57,99,156 रुपये2016-17 1,20,92,972 रुपये

2017-18 3,34,64,905 रुपये

सीएमओ की सफाई
निरुपम के इन आरोपों के जवाब में सीएमओ ने अपनी सफाई में कहा कि आरटीआई में दी गई जानकारी का गलत अर्थ निकाला गया है। सीएमओ ने अपनी सफाई में कहा कि यह रकम सिर्फ चाय पर खर्च नहीं हुई है, अपितु इसमें चाय, नाश्ता, खाना, मंत्रिमंडल की बैठकों में परोसा जाने वाला नाश्ता, सत्कार के लिए लगने वाले पुष्पगुच्छ, शॉल-श्रीफल, गिफ्ट, विभिन्न विभागों की बैठक, मुख्यमंत्री से मिलने आने वाले शिष्टमंडल आदि के स्वागत सत्कार का खर्च भी शामिल है।

मुंबई कांग्रेस अध्‍यक्ष संयज न‍िरुपम ने इस पर कहा, ‘एक तरफ किसानों के लिए सरकार के पास पैसा नहीं है, दूसरी तरफ आम आदमी से कर के रूप में वसूले जाने वाले पैसे की लूट मची है। जनता इसके लिए भाजपा सरकार को माफ नहीं करेगी।’

इस मामले पर मुंबई मुख्‍यमंत्री सच‍िवालय ने कहा, ‘पहले मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित विभागवार बैठकों का खर्च संबंधित विभाग देते थे। अब मुख्यमंत्री सचिवालय भुगतान करता है। बैठकों की संख्या और महंगाई दोनों बढ़ गई हैं। मुख्यमंत्री से मिलने आने वालों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। इसलिए खर्च ज्यादा दिख रहा है।’