ठाणे, महाराष्ट्र की ठाणे जिला सत्र न्यायालय ने वर्तक नगर निवासी 33 साल के एक व्यक्ति को अपनी पत्नी की हत्या के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामले में आरोपी के बच्चों (11 और 8 साल) की गवाही के आधार पर फैसला लिया गया। वकीलों के मुताबिक इस तरह के मामले बेहद कम हैं जहां एक अभिवावक की हत्या पर फैसले के लिए दूसरे अभिवावक के खिलाफ बच्चों के बयान लिए गए हों।

अतिरिक्त लोक अभियोजक वंदना जाधव ने बताया सेशन कोर्ट के जज एस सी खालिपे ने सदाफल यादव को अपनी पत्नी ऊषा (28) की हत्या के जुर्म में दोषी करार दिया है। दोनों की शादी 15 साल पहले हुई थी। वंदना ने बताया, ‘जब आरोपी के छोटे भाई की शादी हुई थी तो उनके परिवार को दहेज में अच्छी-खासी रकम मिली थी। इसके बाद ऊषा को भी दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। जिसके बाद रोज़ – रोज की घरेलू प्रताड़नाओं से आजिज आकर ऊषा ने एक एनजीओ में अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद ससुराल पक्ष के लोगोंं ने एनजीओ को आश्वस्त किया कि वह अब ऊषा को परेशान नहीं करेंगे और शिकायत वापस लेने का आग्रह किया।’

वंदना के अनुसार, ‘उस दिन घर वापस लौटने के बाद ऊषा को और प्रताड़ित किया जाने लगा। उनके खाने-पीने से लेकर पैरंट्स से बातचीत पर रोक लगा दी गई।’ वंदना ने बताया, ‘आरोपी उसे तब तक पीटता रहता था जब तक वह नीली नहीं पड़ जाती। चूंकि बच्चे छोटे थे इसलिए ऊषा ने पुलिस शिकायत दर्ज नहीं कराई और उम्मीद थी कि समय के साथ सब ठीक हो जाएगा।’

इसके बाद 23 जून 2014 को सदाफल यादव ने बच्चों के सामने साड़ी से उसका गला घोंटकर मार डाला और इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए पंखे से लटका दिया। बच्चों ने पुलिस को उस दिन की पूरी घटना बताई। ऊषा की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी स्पष्ट हो गया कि उनका गला घोंटा गया था। पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए सदाफल यूपी के सिद्धार्थनगर में अपने रिश्तेदारों के यहां भाग गया था। जानकारी मिलने पर पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।

जज ने आरोपी के खिलाफ उसके बच्चों की गवाही को साक्षी मानकर फैसला सुनाया। बच्चों ने बताया था कि आरोपी अक्सर उनकी मां को पीटता था। बच्चों ने बताया था कि वह उनकी मां को किताबें और स्टेशनरी खरीदने के लिए पैसे नहीं देता था और मां के हाथ से खाना और पानी तक स्वीकार नहीं था। हालांकि पर्याप्त सबूत न होने के चलते मामले में मृतका के ससुराल पक्ष के आरोपी चार लोगों को बरी कर दिया गया।