मुंबई, महाराष्ट्र के पुणे में भीमा-कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपी संभाजी भिड़ेके समर्थन में प्रस्तावित रैली को रद्द कर दिया गया है। गौरतलब हो कि हिंदूवादी संगठन शिव प्रतिष्ठान के संस्थापक संभाजी भिड़े के समर्थन में मुंबई के आजाद मैदान में बुधवार को रैली होनी थी। इससे पहले शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान के प्रमुख भरत माली के नेतृत्व में प्रतिनिधि मंडल ने विधान भवन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी।

इससे दो दिन पहले मुंबई के आजाद मैदान में दलित नेता प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व में भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपी संभाजी भिड़े की गिरफ्तारी की मांग के लिए भारी भीड़ इकट्ठा हुई थी। प्रकाश आंबेडकर के नेतृत्व वाले ‘यलगार मोर्चे’ ने सीएम फडणवीस से मुलाकात कर सरकार को संभाजी को गिरफ्तार करने के लिए आठ दिन का अल्टिमेटम दिया था।

बता दें कि एक ऐंग्लो-मराठा जंग की 200वीं सालगिरह के जश्न के दौरान एक जनवरी को पुणे के भीमा-कोरेगांव में हिंसा हो गई थी। इस जंग में पेशवा बाजीराव (ll) की सेना ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना से हार गई थी। ब्रिटिश सेना में दलितों की बड़ी संख्या थी। इसके बाद दो पक्षों में बवाल हुआ और हिंसा भड़क उठी थी।

कई दलित संगठनों का आरोप है कि यह पूरा विवाद संभाजी भिड़े और मिलिंद एकबोटे का किया-धरा है। संभाजी भिड़े (85) और मिलिंद एकबोटे के खिलाफ 2 जनवरी को हिंसा भड़काने के मामले में एससी/एसटी ऐक्ट समेत आईपीसी की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। एकबोटे को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था और उनकी अंतरिम बेल को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

देवेंद्र फडणवीस ने भिड़े को दी क्लीनचिट

शिव प्रतिष्ठान हिंदुस्तान मुंबई में बाइकुला से आजाद मैदान तक और पुणे में शनिवारवाड़ा से जिला कलेक्ट्रेट तक रैली निकालना चाहता था। मुंबई पुलिस ने संस्था को आजाद मैदान में रैली करने की अनुमति दे दी थी लेकिन पुणे पुलिस की तरफ से अनुमति का इंतजार किया जा रहा था।

शिव प्रतिष्ठान के पुणे जिले के अध्यक्ष संजय जाधर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने ऐन वक्त पर रैली की इजाजत नहीं दी। जाधर ने कहा कि संस्था चाहती है कि भिड़े के खिलाफ मामला तुरंत वापस लिया जाए।

इस बीच महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को दक्षिणपंथी हिंदुत्व नेता संभाजी भिड़े को भीमा-कोरेगांव हिंसा के मामले में क्लीनचिट दे दी है। सीएम ने विधानसभा में बताया कि भिड़े या उनके समर्थक इलाके में नहीं थे। सीएम ने सदन को बताया कि कि भिड़े हिंसा के वक्त किसी के साथ फोन पर नहीं जुड़े थे।