मुंबई, मुंबई में केंद्र सरकार की जमीनों पर हजारों की संख्या में बसे झोपड़पट्टी निवासियों का ऊंची इमारतों में रहने का ख्वाब पूरा हो सकता है। केंद्र सरकार ने रेलवे, रक्षा मंत्रालय, बीपीटी, सीमा शुल्क, एयरपोर्ट प्राधिकरण, टाटा मेमोरियल ट्रस्ट और आईआईटी मुंबई की जमीनों पर बसे झोपड़ों का सर्वे कराने की अनुमति दे दी है। केंद्र की इस पहल से माना जा रहा है कि केंद्र सरकार की जमीनों पर बसे झोपड़ों के विकास का रास्ता खुल जाएगा।

सोमवार को विधान परिषद में शिवसेना के सदस्य अनिल परब ने सांताक्रुज स्थित रक्षा मंत्रालय की जमीन पर बसे झोपड़ों के विकास के संबंध में सवाल पूछा। परब ने कहा कि 50 साल से वहां झोपड़े बसे हैं। अब सेना के लोग आकर वहां के लोगों को झोपड़े खाली करने के लिए कहते हैं। आकर धमकाते हैं कि खाली कर दो, वर्ना यहां से सबका सामान उठाकर फेंक देंगे। इससे लोग परेशान हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब राज्य सरकार की जमीनों पर बसे झोपड़ों पर एसआरए योजना लागू की जाती है, तो फिर केंद्र सरकार की जमीनों पर बसे झोपड़ों का पुनर्वास क्यों नहीं हो रहा? कांग्रेस के भाई गिरकर व दूसरे अन्य सदस्यों ने भी केंद्र की जमीनों पर बसे झोपड़े के विकास का मामला उठाया।

सदस्यों के उठाए सवालों पर गृह निर्माण राज्य मंत्री रवींद्र वायकर ने कहा कि केंद्र की जमीनों पर एसआरए योजना लागू नहीं की जा सकती। यहां तक कि केंद्र सरकार की जमीनों पर बसे झोपड़ों के सर्वे का अधिकार भी राज्य सरकार को नहीं था, लेकिन केंद्र सरकार ने रेलवे, रक्षा मंत्रालय, बीपीटी, सीमा शुल्क, एयरपोर्ट प्राधिकरण, टाटा मेमोरियल ट्रस्ट और आईआईटी मुंबई की जमीन पर बसे झोपड़ों के सर्वे का अधिकार हाल ही में दिया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने देश के हर एक नागरिक को सन 2022 तक घर देने की योजना बनाई है। उसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार केंद्र के साथ मिलकर काम रही है, ताकि 2022 के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।