मुंबई, मुंबई से एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के बेटे को एक प्राइवेट फर्म के डायरेक्टर का फर्जी सिग्नेचर बनाने के जुर्म गिरफ्तार किया गया है। फर्जी सिग्नेचर बनाकर कंपनी हथियाने की कोशिश चल रही थी। गिरफ्तार अमित सुरोलिया ने अपने पिता के चपरासी को कंपनी का निदेशक बना डाला था।

सोमवार को अमित गिरफ्तार हुआ लेकिन उसके पिता अभी भी फरार हैं। उनके साथ उनके चपरासी ज्ञानेश्वर फड़के और प्रवाण शाह भी गायब हैं। बता दें कि ज्ञानेश्वर फड़के वर्ली की जनता कॉलोनी स्थित झुग्गियों में रहता है और उसे 12 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनियों का निदेशक दिखाया गया। पुलिस ने आईपीसी की धोखाझड़ी, जालसाजी और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।

एनआरके ओवरसीज इंडिया नामक कंपनी के निदेशक राकेश काबरा और उनकी पत्नी नम्रिता काबरा ने 2016 में दर्ज करवाई गई शिकायत में बताया था कि उनकी मुलाकाता प्रमोद सुरोलिया से 1995 में हुई थी, तब वह बैंक ऑफ राजस्थान की साउथ मुंबई ब्रांच में मैनेजर था। 2006 में रिटायर होने के बाद प्रमोद ने खुद की सीए कंसल्टेंसी खोल ली और राकेश काबरा ने प्रमोद को अपने यहां ऑडिटर नियकित् कर लिया।

2012 में काबरा को झटका लगा जब उन्हें पता चला कि बिना उनकी जानकारी के ही ज्ञानेश्वर फड़के और रवींद्र रेड्डी को कंपनी के निदेशकों में शामिल किया गया है। वह तुरंत रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (ROC) की वेबसाइट पर गए तो पाया कि उनके सिग्नेचर से फर्जी दस्तावेज तैयार करके इन दोनों को तीन साल पहले कंपनी का निदेशक बना दिया गया था। एक साल बाद यह भी पता चला कि सुरोलिया ने उन्हें उनकी ही कंपनी से निकाल भी दिया है।

काबरा ने साकी नाका थाने में और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में शिकायत दर्ज करवाई। ROC ने साकी नाका पुलिस को सुरोलिया के खिलाफ केस दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके अलावा ROC ने काबरा को भी निर्देश दिए कि वह कंपनी लॉ बोर्ड के पास अपील करें।