मुंबई, मुंबई पुलिस ने एक बैंक फ्रॉड की जांच के दौरान एक प्राइवेट फर्म के तीन निदेशकों को गिरफ्तार किया है। पारेख अल्यूमिनेक्स लिमिटेड नाम की कंपनी पर देनदारों ने 4000 करोड़ रुपये बकाए का आरोप लगाया है, जिसे लेकर जांच चल रही है।

भंवरलाल भंडारी, प्रेमल गोरागांधी और कमलेश कानूनगो को इकनॉमिक ऑफेंसेज विंग ने शुक्रवार को धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा, ब्रीच ऑफ ट्रस्ट और आपराधिक साजिश के तहत गिरफ्तार किया। कंपनी के खिलाफ ऐक्सिस बैंक ने 250 करोड़ की धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज की थी।

कंपनी को एक्सपोज करने वाले 20 देनदारों में से एक ऐक्सिस बैंक भी था। जिन लोगों को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया है, उनके खिलाफ बैंक की फोर्ट स्थित ब्रांच में फर्जी इनवॉइस और बोगस कंपयों के जरिये छेड़छाड़ किए गए बिल जमा करने का आरोप है।

हालांकि इस मामले में पुलिस बैंक कर्मियों की मिलीभगत होने की बात से इनकार नहीं कर रही है। ऐक्सिस बैंक की शिकायत में अमिताभ पारेख, राजेंद्र गोठी, देवांशु देसाई, किरण पारेख और विक्रम मोरडानी का नाम भी है। अमिताभ पारेख का 2013 में निधन हो चुका है। वहीं, पारेख अल्यूमिनेक्स के खिलाफ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और इंडियन ओवरसीज बैंक की शिकायत पर सीबीआई पहले से ही जांच कर रही है। उनका आरोप है कि कंपनी रियल स्टेट डिवेलपर्स को फंड डाइवर्ट कर देती थी।

ये था फ्रॉड का तरीका
पुलिस के मुताबिक कंपनी पहले ऐक्सिस बैंक से 125 करोड़ के तीन शॉर्ट टर्म लोन लिए और बैंक का भरोसा जीतने के लिए चुका भी दिए। साल 2011 में पारेख ने ऐक्सिस बैंक से 127.5 करोड़ रुपये का लोन लिया। इसके लिए उसने बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की एक ऐसी मीटिंग से जुड़े दस्तावेज दिए जो मीटिंग कभी हुई ही नहीं थी। बैंक ने कंपनी को कच्चा माल और उपकरण खरीदने के लिए लोन दे दिया।

पारेख ने कंपनी के अकाउंट से पैसे अपने पर्सनल अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए और कच्चा माल और उपकरण खरीदने के फर्जी बिल बैंक को दिखा दिए। जिस कंपनी से ये सब खरीदने का दावा किया गया था, वह कागजी निकली। यही नहीं एक कंपनी को माल बेचे जाने के भी फर्जी बिल लगा दिए।

ट्रांसपोर्ट बिलों की जांच होने पर पता लगा कि गाड़ियों के नंबर भी फर्जी थे। दिए गए नंबर दोपहिया वाहनों के थे। बैंक का विश्वास जीतने के लिए लोन की जो रकम पारेख के पर्सनल अकाउंट में भेजी गई थी उसी से लोन चुका दिया गया।