मुंबई, कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर मुंबई के आजाद मैदान में डटे हजारों किसान अब विधानसभा घेरने की तैयारी में हैं। किसानों के इस फैसले के बाद महाराष्ट्र में सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य के सीएम देवेंद्र फडणवीस किसानों को मनाने का प्रयास तेज कर चुके हैं। सीएम की किसान प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक भी चल रही है। सीएम किसानों की मांग के प्रति सकारात्मक रुख की बात कह चुके हैं।

मीटिंग से पहले देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘हमारी सरकार किसानों की मांग के प्रति सकारात्मक है। मोर्चा के पहले दिन से ही हमलोग किसानों की कई मांगों को लेकर बातचीत की है। शुरुआत से ही जल संसाधन मंत्री गिरिश महाजन किसानों के साथ संपर्क में हैं। हालांकि, किसान पहले से ही मार्च निकालने को लेकर अटल थे।’

farmersइस बीच किसानों के मार्च का मसला महाराष्ट्र विधानसभा में भी उठा। विपक्ष के नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल ने किसानों की सभी मांगें तत्काल मानने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर किसानों की मांग नहीं मानी तो उनके श्राप से सरकार भस्म हो जाएगी। इस बीच फडणवीस खुद किसानों को मनाने में जुट गए हैं। विधानसभा में सीएम ने अन्य नेताओं के साथ बैठक भी की है।

किसान नेता अजित नवले ने कहा है कि एक भी मांग नहीं मानी तो किसान आजाद मैदान में ही अन्न त्याग कर देंगे। वहीं महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन मंत्री ने कहा, ‘मुझे लगता है कि हम उनके 80-90 प्रतिशत मुद्दों का समाधान कर देंगे। हम उनकी मांगों को लेकर गंभीर हैं और हम सबसे अच्छे फैसले लेंगे।’

किसानों की लिए राजनीतिक वाद-विवाद दरकिनार करते हुए सियासी दल उनकी खिदमत में जुट गए हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता किसानों को खाना खिलाने पहुंचे। शिवसेना और जमीयत उलेमा महाराष्ट्र भी बढ़-चढ़कर किसानों की मदद कर रहे हैं। इस किसान आंदोलन को सभी गैर-राजनीतिक दलों ने समर्थन दिया है।