मुंबई, कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग को लेकर एक तरफ जहां मुंबई के आजाद मैदान में पहुंचे हजारों किसान विधानसभा घेरने की तैयारी में हैं तो दूसरी तरफ इसे लेकर महाराष्ट्र से दिल्ली तक सियासत भी तेज हो गई है। महाराष्ट्र में जहां तकरीबन सभी गैर-बीजेपी पार्टियों ने किसानों के आंदोलन को समर्थन का ऐलान किया है, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसे महज एक सूबे के नहीं, बल्कि पूरे देश के किसानों का आंदोलन करार दिया है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने सोमवार को आंदोलनकारी किसानों का समर्थन करते हुए कहा कि यह सिर्फ महाराष्ट्र के किसानों का आंदोलन नहीं है बल्कि पूरे देश के किसानों का आंदोलन है। उन्होंने कहा कि पूरे देश के किसानों की समस्या है। आपको बता दें कि मुंबई से करीब 150 किलोमीटर दूर नासिक से चला किसानों का हुजूम 5 दिनों के बाद फिलहाल मुंबई के आजाद मैदान में पहुंचा हुआ है। यहां से किसान महाराष्ट्र विधानसभा के घेराव के लिए कूच करेंगे।

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे जहां किसानों के इस मार्च में शामिल हो चुके हैं, वहीं एनसीपी नेता शरद पवार ने भी पार्टी नेताओं को किसानों के मार्च में शामिल होने को की बात कही है। साथ ही एमएनएस चीफ राज ठाकरे भी आंदोलनकारी किसानों से मुलाकात कर उन्हें समर्थन का ऐलान कर चुके हैं।

ये हैं किसानों की मांगें
-कृषि उपज की लागत मूल्य के अलावा 50 प्रतिशत लाभ दिया जाए।
-सभी किसानों के कर्ज माफ किए जाएं ।
-नदी जोड़ योजना के तहत महाराष्ट्र के किसानों को पानी दिया जाए।
-वन्य जमीन पर पीढ़ियों से खेती करते आ रहे किसानों को जमीन का मालिकाना हक दिया जाए।
-संजय गांधी निराधार योजना का लाभ किसानों को दिया जाए।
-सहायता राशि 600 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति माह की जाए।
-स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

किसानों के आंदोलन से हरकत में आई देवेंद्र फडणवीस सरकार अब डैमेज कंट्रोल मोड में आ चुकी है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने अपने मंत्री को दूत के तौर पर आंदोलनकारी किसानों के पास भेजकर बातचीत का न्योता दिया है। मुख्यमंत्री और आंदोलनकारी किसानों की सोमवार दोपहर 2 बजे के करीब मुलाकात हो सकती है। इस बीच आंदोलनकारी किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य सरकार की तरफ से उन्हें उनकी मांगों को माने जाने का लिखित आश्वासन नहीं मिला तो वे विधानसभा का घेराव करेंगे।