मुंबई, संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती का नाम बदलकर पद्मावत रखने के बावजूद भी राजपूतकरणी सेना पर  नहीं दिख रहा है। रिलीज से पहले मचा घमासान अब सेंसर बोर्ड के दफ्तर तक पहुंच गया है। संजय लीला भंसाली की फिल्म का नाम पद्मावती से बदलकर पद्मावत करने समेत कई बदलाव का राजपूतकरणी सेना पर फिलहाल कोई असर नहीं दिख रहा है।

शुक्रवार को मुंबई में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के दफ्तर को करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने घेर लिया। इस दौरान हंगामा करते हुए प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने करणी सेना के 96 वर्कर्स को हिरासत में लिया है।

करणी सेना के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए इलाके में पहले से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इस दौरान छोटे-छोटे समूहों में आ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने मौके से हटाया। हिरासत में लिए गए लोगों को सेंसर बोर्ड के दफ्तर से गामदेवी पुलिस स्टेशन लाया गया। इस बीच फिल्म की रिलीज पर रोक की मांग को लेकर अड़े प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महज फिल्म का नाम बदलना पर्याप्त नहीं है। करणी सेना का कहना है कि फिल्म को देशभर में बैन किया जाए। इससे कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है।

फिल्म पद्मावत के खिलाफ राजपूत समाज के संगठनों की नाराजगी के बाद राजस्थान में फिल्म को बैन किया जा चुका है। राज्य की वसुंधरा राजे सरकार ने वर्मान स्वरूप में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई है। इसके अलावा हिमाचल और मध्य प्रदेश में भी फिल्म रिलीज नहीं की जाएगी। 25 जनवरी को रिलीज हो रही फिल्म में दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के साथ शाहिद कपूर ने मुख्य भूमिका निभाई है।