अगर आप अपना घर खरीदने का मन बना रहे हैं, लेकिन बिल्डरों की मनमानी और प्रोजेक्ट लेट किए जाने की आशंका से डरे हुए हैं तो आपके लिए राहत की खबर है। 1 मई 2017 से रियल एस्टेट एक्ट (RERA) यानि रेरा लागू हो रहा है। रेरा बिल्डरों की मनमानी से निजात दिलाने और बॉयर्स को शोषण से बचाने का ये क्रांतिकारी कानून पिछले साल मार्च में संसद में पास हुआ था। रेरा कानून लागू होने के बाद बिल्डर किसी भी हालत में खरीददार से धोखाधड़ी नहीं कर सकेगा। अगर बिल्डर नियम तोड़ते हैं तो बिल्डर को तीन साल तक की जेल हो सकती है।

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नए प्रावधानों के अनुसार सभी बिल्डरों को जुलाई आखिर तक पहले से चल रहे और नए आवासीय प्रोजेक्ट को रीयल एस्टेट अथॉरिटी में पंजीकरण कराना होगा। वहीं, हर प्रोजेक्ट का अथॉरिटी से सेक्शन प्लान और लेआउट प्लान अपनी वेबसाइट के साथ सभी कार्यालयों की साइट्स पर छह वर्ग फीट के बोर्ड पर लगाना होगा।

धांधली करने पर हो सकती है 3 साल की जेल

घर खरीदारों की सबसे बड़ी शिकायत यही रहती है कि उनसे जिन सुविधाओं की बात बिल्डर ने की थी वह नहीं मिली। प्रोजेक्ट का लेआउट व अन्य चीजें बीच में बिना उनकी सहमति से बदल दी जाती हैं लेकिन रेरा के तहत अगर बिल्‍डर प्रोजेक्‍ट के ब्रौशर और विज्ञापन में किए गए वादे पूरा नहीं करता तो उसे 3 से 5 साल तक की जेल हो सकती है।

 
पहले रजिस्ट्रेशन, फिर शिकायत

फिलहाल तो रेग्युलेटर प्रॉजेक्ट के रजिस्ट्रेशन पर ध्यान देगा। जब इन प्रॉजेक्ट्स के रजिस्ट्रेशन का काम पूरा हो जाएगा, तब उनसे जुड़ी किसी भी प्रकार की शिकायत संबंधित व्यक्ति कर सकेगा। इसमें प्रॉजेक्ट में विलंब से लेकर बिल्डर की मनमानी तक की शिकायतें शामिल होंगी।

70 प्रतिशत पैसा रखना होगा अकाउंट में

किसी भी प्रॉजेक्ट की बिक्री से आने वाले 70 प्रतिशत रकम को अलग अकाउंट में रख बिल्डर काम पूरा करते हुए चरणबद्ध तरीके से ही उसे निकाल पाएगा। इससे समय पर प्रॉजेक्ट पूरा होने की संभावना बढ़ जाएगा।

खरीदारों को होगा ये फायदा

रेरा से डेवलेपरों को बहुत फायदा होगा जैसे-डेवलेपरों के वो सभी प्रोजेक्ट जो अभी अंडर कंस्ट्रक्शन हैं या जिन्हें कंपलीशन सर्टिफिकेट नहीं मिला है या फिर जो नए प्रोजेक्ट लांच होने वाले हैं उन सबको तीन महीने के अंदर नियामक प्राधिकरण में रजिस्टर्ड कराना होगा। राज्यों के लिए ये जरूरी है कि वे इसके तहत प्राधिकरण गठित करें. सभी रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट का पूर्ण विवरण प्राधिकरण के पास होगा, जिसमें प्रमोटर, परियोजना, ले-आउट, योजना, भूमि की स्थिति, समझौते, रियल एस्‍टेट एजेंट, ठेकेदार, इंजीनियरों आदि के बारे में विस्‍तृत जानकारी होगी. प्रोजेक्ट कब पूरा होगा इसकी तारीख भी देनी होगी.

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13 राज्यों में रेरा को हरी झंडी

रेरा की सभी 92 धाराएं एक मई से प्रभावी हो जाएंगी. हालांकि केवल 13 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों ने ही अबतक इसके नियम अधिसूचित किए हैं. इनमें उत्तर प्रदेश, गुजरात, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, चंडीगढ़, दादर और नागर हवेली, दमनदीव, लक्षद्वीप आदि ने नियम अधिसूचित किए हैं.

विज्ञापन करते समय भी रखना होगा ध्यान

किसी भी प्रॉजेक्ट का विज्ञापन करते समय बिल्डर को रजिस्ट्रेशन नंबर बताना होगा। इसके आधार पर लोग आसानी से सभी जानकारियां ले सकेंगे। इसके अलावा, केवल आकर्षक फोटो देकर विज्ञापन नहीं किया जा सकेगा। बिल्डर को वास्तविक प्रॉजेक्ट के आधार पर ही विज्ञापन देना होगा। आकर्षक डिजाइन दिखाकर ग्राहकों को नहीं लुभाया जा सकेगा।

रेरा से कैसी सहूलियत मिलेगी?

– ग्राहक 5,000 रुपये जमाकर बिल्डर के खिलाफ कर सकेंगे शिकायत

– 51 प्रतिशत बिक्री हो जाने के बाद बिल्डर को सोसायटी बनानी होगी

– 3 ईएमआई न चुकाने पर रजिस्टर्ड पोस्ट द्वारा नोटिस देकर समझौता रद्द किया जा सकेगा

– सौदा रद्द करने के 1 महीने के अंदर ग्राहक का पैसा लौटाना होगा जरूरी

– बिल्डर की ओर से गलती न होने पर प्रॉजेक्ट पूरा करने की सीमा अधिकतम 1 साल तक बढ़ाई जा सकती है

– नियमों का पालन न करने पर बिल्डर के अकाउंट में लेन-देन पर रोक लगाई जा सकती है

– किसी भी प्रकार की गलत जानकारी देने पर बिल्डर को ग्राहक को ब्याज सहित पैसा चुकाना होगा